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Backमरु क्षेत्रीय परिसर में चार दिवसीय मशीन ऊन कल्पन पर प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम
केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान के मरु क्षेत्रीय परिसर बीकानेर में मशीन द्वारा ऊन कल्पन पर चार दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 18 से 21 फरवरी 2017 को किया गया । यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मगरा नस्ल सुधार परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया जिसमें तकनीकी सहयोग उत्तराखंड ऊन विकास बोर्ड के प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा लिया गया । इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के लगभग 21 युवक भेड़ पालकों ने भाग लिया एवम साथ ही साथ बीकानेर स्थित मगरा परियोजना में कार्य कर रहे लगभग 50 भेड़ पालको ने भी भाग लिया । इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ एन वी पाटिल ने बताया कि अगर सभी भेड़ पालक भेड़ पालन को व्यवसाय के रूप में लेवे तो उनको ऊन विपणन में सुविधा होगी एवं आय अधिक होगी । कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री कमल कल्ला राजस्थान उद्योग संघ के अध्यक्ष ने इस अवसर पर कहा कि बीकानेर में रोजाना 4 लाख किलो ऊन विदेशों से गलीचा उत्पादन के लिए मंगाई जाती है जिससे देश की मुद्रा विदेश में जाती है । अतः उधोग धन्धों को ऊन उत्पादन का कार्य किसानों के साथ मिलकर करना चाहिए जिससे ऊन उत्पादन भी बड़ेगा एवं उसकी लागत भी कम आएगी । इस परिसर के प्रभागाध्यक्ष डॉण् एण् केण् पटेल ने भेड़ पालकों को बताया की भेंड़ों की ऊन की कटाई का कार्य अगर मशीन द्वारा किया जाता है तो इस ऊन उत्पादन में नई क्रांति का आगाज होगा और इससे किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाली उन मिलेगी एवं साथ.साथ उनको आमदनी भी अधिक होगी । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत रोजाना सभी भेड़ पालको ने संस्थान में स्थित भेड़ फार्म में भेड़ों की ऊन की कटाई का कार्य मशीन द्वारा करने का अभ्यास किया गया। ऊन छंटाई, धागा बनाने एवं ऊन से सम्बन्धित अन्य कार्य देखने के लिये सभी प्रशिक्षणार्थीयो को उधोग इकाईयो में भ्रमण करवाया गया।
इस प्रशिक्षण के समापन समोराह में निदेशक प्रसार (MPAUT) उदयपुर के डॉ घनश्याम तिवारी ने इस देश में हि ऊन कल्पन कि मशीन निर्माण कि बात पर जोर दिया जिससे मशीन कि कीमत बहुत कम हो सकेगी एवं इसका प्रयोग आमजन में बढ सकेगा। कार्यक्रम का संचालन डा. एच. के. नरुला, प्रधान वैज्ञानिक ने किया।
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